Sunday, 14 August 2022

घर घर तिरंगा फहराते हैं.....



आज़ादी का अमृत उत्सव मनाते हैं। 

हर घर, घर घर तिरंगा फहराते  हैं। 

केसरिया रंग हैं त्याग बलिदान का। 

सफेद रंग शांति एकता सन्मान का। 

अशोक चक्र हैं शांति का सन्देश हैं।

हरा, विश्वास, उर्वरता का आदेश हैं।

इसीसे हम भारत देश को जानते हैं। 

हर घर, घर घर तिरंगा फहराते हैं।


Tuesday, 26 July 2022

खड़ा हैं यह घर हमारा ....

 


गांव में खड़ा हैं यह घर हमारा 

दीवारों के कंकाल का मारा मारा 

बचपन पूरा यहीं गुजरा हमारा 

माँ बाप के साथ लगता था प्यारा 

गांव में खड़ा हैं यह घर हमारा




Saturday, 25 December 2021

बेंगलुरु तालबों और पेड़ों का....

तालबों का  शहर कहलाता 

पेड़ों का शहर कहलता 

कुछ तालब सूखायें  लिएँ 

कुछ पेड़ोंको  काट दिएँ 

शहर के विकास के लिएँ 

लोगों की विकास के लिएँ 

अब विकास का शहर कहलाता 

प्रगति पथ का शहर कहलाता 


Thursday, 31 December 2020

नया साल शुभ हो, हर जन कहता हैं....


जब एक अंक बदल जाता हैं । 

उसके बाद नया साल आता हैं। 

सप्ताह के दिन तो वही रहता हैं।  

लेकिन दिन का अंक बदल जाता हैं। 

जब नया अंक साल में बदलता हैं। 

नया साल शुभ हो, हर जन कहता हैं। 

Wednesday, 21 October 2020

खड़ा हैं जो ईटों पर....


कमर पे हाथ रखकर।  
खड़ा हैं जो ईटों पर। 
राजा पंढरी का हैं जो,
देवो के देव  है वो। 
आशीर्वाद देते हैं भक्तों को,
अपनी नज़र रखकर। 
खड़ा हैं जो ईटों पर। 
कमर पे हाथ रखकर।  

Friday, 12 June 2020

ऐसी हैं शिव तेरी काया....


ऐसी हैं शिव तेरी काया। 
रूप हैं जो सब को भाया। 
नीलकंठ, गंगाधर, महादेव,
यह हैं तेरी लीला और माया। 

देवों के देव महादेव, नाम कालेश्वर...



देवों के देव महादेव, नाम कालेश्वर।
ऐसा सजता जब  हैं फूलों मे इश्वर। 
नमन हैं ऐसे देवों के देव महदेव को,
नमन हैं ऐसे नीलकंठ जो हैं महेश्वर। 

हरियाली बोलती हैं आसमां देखकर...



तस्वीर बोलती हैं आसमां पे झुककर।
हरियाली बोलती हैं आसमां देखकर। 
ऐसा नज़ारा देखने को मन करता हैं.
देखते  रह गएँ हम  नज़र झुकाकर। 
हरियाली बोलती हैं आसमां देखकर। 


























Wednesday, 20 July 2016

बेंगलुरु का हैं राजमहल...

राजभवन खड़ा हैं शान से 
खड़ा हैं वो अपने मान से 
हरियाली का वस्त्र पहनकर 
दुल्हन खड़ी हैं सजधजकर 
बेंगलुरु का हैं राजमहल 
इसे देख मन जाता हैं बहल 
खड़ा हैं जैसे अपने आन से 
खड़ा हैं वो अपने मान से 
राजभवन खड़ा हैं शान से 




तस्वीर में सजाते...


जब बीतता हैं एकेक पल 
जब वो बन जाता हैं कल 
बचपन की वो तस्वीर 
दिखती हैं अपनी तक़दीर 
यादों में सजाते हैं वो कल
तस्वीर में सजाते हैं वो पल  
तेजी से गुजरता हैं पल
जब वो बन जाता हैं कल