Wednesday, 20 July 2016

बेंगलुरु का हैं राजमहल...

राजभवन खड़ा हैं शान से 
खड़ा हैं वो अपने मान से 
हरियाली का वस्त्र पहनकर 
दुल्हन खड़ी हैं सजधजकर 
बेंगलुरु का हैं राजमहल 
इसे देख मन जाता हैं बहल 
खड़ा हैं जैसे अपने आन से 
खड़ा हैं वो अपने मान से 
राजभवन खड़ा हैं शान से 




तस्वीर में सजाते...


जब बीतता हैं एकेक पल 
जब वो बन जाता हैं कल 
बचपन की वो तस्वीर 
दिखती हैं अपनी तक़दीर 
यादों में सजाते हैं वो कल
तस्वीर में सजाते हैं वो पल  
तेजी से गुजरता हैं पल
जब वो बन जाता हैं कल

Monday, 18 July 2016

यह शहर कैसा चमकता हैं...

यह शहर कैसा चमकता हैं
अँधेरे में कैसे दमकता हैं
यहाँ इमारतें  कुछ बोलती हैं
प्रगति का का राज़ खोलती हैं
शांघाई हैं इस शहर का नाम
चमकना ही हैं इसका काम 
यह शहर कैसा चमकता हैं
अँधेरे में कैसे दमकता हैं

Thursday, 28 August 2014

रंगोली बोलती हैं.…


रंगोली कुछ हमसे बोलती हैं..
दिल के राज हमसे  खोलती हैं  

मयूर पंखलीये  सजती हैं 
सप्तरंग से अब जचती हैं 
नयें उत्साह से  यह डोलती  हैं 
रंगोली कुछ हमसे बोलती हैं 



Saturday, 13 April 2013

सूरज निकला ....


सुनहरी किरणों का फैला कर ज़ाल  
सूरज निकला लेकर अपनी चाल 
पहाड़ों के पीछे से  उप्पर चढ़कर 
सूरज की किरणें पेड़ों को चीरकर 
जमीं पर बिछाकर एक सुनहरी शाल   
सूरज निकला लेकर अपनी चाल 

Saturday, 16 March 2013

'ट्रैफिक जाम'

जब आयी एक सुनहरी शाम
लेकर एक बड़ा 'ट्रैफिक जाम'
जल्दी घरको हैं अब जाना
दुआ करें, सडक बड़ी बनाना
जहाँ आना और जाना हो आम
जब  आयी एक सुनहरी शाम
लेकर एक बड़ा 'ट्रैफिक जाम '

Saturday, 8 December 2012

इसलियें बना यह सेतु...


समन्दर पे भी हमने दिखा दिया हैं दम 
अब बांद्रा से वरली का रास्ता हुआ कम 
हमारा  एक ही हैं लक्ष्य और एक ही हेतु 
मंजिल हो पास  इसलियें बना यह सेतु 
जमीं नहीं अब समन्दर पे दौड़ रहे हैं हम 
अब बांद्रा से वरली का रास्ता हुआ कम 
समन्दर  पे भी हमने दिखा दिया हैं दम 

Sunday, 2 December 2012

सूरज मुखी...




सूरज को देख कर खिलती हैं सूरज मुखी
अगर सूरज ढल जाता हैं  तो होती हैं दुखी
सूरज मुख लेकर सूरज से करती है प्यार,
रात में  सूरज के इन्तजार में रहती हैं झुकी
सूरज को देख कर खिलती हैं सूरज मुखी 

Sunday, 11 November 2012

शुभ दीपावली मनातें हैं ...



चलो शुभ दीपावली मनातें  हैं 
धुँआ, पटाखे कम जलाते हैं 
अब एक शुभ काम करना हैं 
अब इसके बिनाही मानते हैं 
शुभ हो आपकी भी दीपावली 
पटाखों बिना काम चलाते हैं 
चलो शुभ दीपावली मनातें  हैं 




Thursday, 11 October 2012

मंदिर खड़ा हैं यहाँ ...


मंदिर खड़ा हैं यहाँ देखो कैसा
दिखता हैं अर्जुन के रथ जैसा
अश्व खिंच रहें हैं धर्म  क्षेत्र में,
राष्ट्रीय महामार्ग सात पे ऐसा
मंदिर खड़ा हैं  यहाँ देखो कैसा
दिखता हैं अर्जुन के रथ जैसा