Sunday, 28 March 2010

बीस्तर बेचते हैं हम...

नींद नहीं , बल्कि बिस्तर बेचते हैं हम।
इनका कहना, नींदही बेचते हैं हम।
हमें बिस्तर से कोई मतलब नहीं,
बिनबीस्तरही चैन की नींद सोते हैं हम।
नींद नहीं, बल्कि बीस्तर बेचते हैं हम।

Sunday, 14 February 2010

पानी का झरना.


पहाडोंसे उतरकर नदी में मिलना,
बूंद बूंद पानी  से बना यह झरना.
नाचते  हुए  पहाड़  से उतरना.
और नदीकी रूप में  समा जाना.
बूंद बूंद पानी से बना यह झरना  

Sunday, 17 January 2010

यही हैं प्यार....

देख यह संसार,
माँ बेटेका प्यार..
बच्चे को सिनेसे लगाकर ,
रखता हैं बन्दर..
यही हैं प्यार,
इंसान हो या बन्दर..

Friday, 8 January 2010

सामनेवाली खिड़की....

मेरे सामने वाली खिड़की से
एक तालाब का टुकडा दीखता हैं .
उसमे कभी सूरज तो कभी चाँद
का मुखड़ा दीखता हैं.

Sunday, 3 January 2010

जीवन एक यात्रा...

जीवन के सफ़र में,
ट्रेन के इंतज़ार में
बेचैन हैं एक और
मकाम की तलाश में
अपनों से मिलने की आस में

Wednesday, 23 December 2009

पढने दो इसे खुद भी पढो...

नन्ने  मुन्ने बच्चे,बंद कर तेरी मुट्ठी...
एक दिन स्कूल की भी होगी छुट्टी...
अभिभावक ज़रा करो इसकी कदर...
न लगे उसके खेल कूद को नज़र...
किस्मत में इसे मत छोडो...
पढने दो इसे खुद भी पढो...    

Thursday, 17 December 2009

रंगबिरंगी गुलाब में संसार हैं....


लाल गुलाब यानी  प्यार हैं.
पीले गुलाब यानी  यार हैं.
नीले गुलाब का नहीं पता.
हरा गुलाब तो नहीं होता.
रंगबिरंगी  गुलाब में संसार हैं.
जिसमे सिर्फ प्यारही प्यार हैं.

Wednesday, 16 December 2009

रास्ता साफ हो तेरा...

रोज का  काम मेरा...
रास्ता साफ हो तेरा...

जरा देखो इनका काम...
कोई तो दो इने इनाम...

रोज का येही हैं फेरा...
रास्ता साफ हो तेरा...

Friday, 11 December 2009

फिरते हैं नक़ाब पहनकर...

चेहरे पे चेहरा लगाकर,
फिरते हैं नक़ाब पहनकर.
दिल को देखो चेहरा नहीं,
पहचानो जो हैं सही.
बैठे हैं सब एहां सजधजकर.
फिरते हैं नक़ाब पहनकर.
चेहरे पे चेहरा लगाकर.  

Friday, 4 December 2009

येही हमारा किसान...


बैलों का जोड़ा लेकर,
चल पड़ा खेत पर.
भूका प्यासा रहता,
कहलाता अन्नदाता.
येही हमारा किसान,
हैं सबसे महान.