Sunday, 7 August 2011

आग में जलकर....




आग में जलकर ही  लोहा पिघलता हैं ....
जलने के बाद उसे  आकार मिलता हैं...
कभी आँख तो कभी हात जलता हैं ..
इसी से ही पेट का चक्का चलता हैं ...
कड़े संघर्ष के बाद ही फल मिलता हैं...
धुप में जलकर ही पेड़पे फूल खिलता हैं ... 
आग में जलकर ही  लोहा पिघलता हैं ..

Thursday, 19 May 2011

क़दमों के निशाँ ...


क़दमों के निशाँ रेत में छोडकर..
चलते हैं जीवन के इस मोड पर....
कई और निशाँ  साथ में समेटे,
वक्त की धारा चलती हैं मिटाकर...
क़दमों के  निशाँ  रेत में छोडकर...

पानी में दिए जलते हैं...



जहाँ पानी में दिए जलते हैं....
वहाँ पानी के फव्वारें चलते हैं ....
रात के घने अंधरे को चीरकर ,
जैसे वो बुँदे रौशनी में पलते हैं....
जहाँ पानी में दिए जलते हैं...

Friday, 14 January 2011

रंग बिरंगी रंगोली..


रंग बिरंगी रंगोली..
खेलती हैं यह होली ..
लिपि अलग अलग हैं, 
लेकिन एक ही हैं बोली..
इसमें समाई हैं दुनिया,
खेलती आँखमीचोली..
रंग बिरंगी रंगोली.. 

Saturday, 6 November 2010

नये कल की नयी सोच ..


नये कल की नयी सोच लेकर आया..
आँखों में एक नया तेज लेकर आया..
ले ले मजा अब तु एक एक पल का ..
किस बोज़ तले डूबेगा,पता नहीं कल का..
तेरा अहंकार किसे तु देकर आया...
नए कल की नयी सोच लेकर आया...

Saturday, 23 October 2010

कतार में खड़े हैं.....

सवारी  की राह में, कतार में खड़े हैं...
तोल कहे तो, अपने ही मोल पर अड़े हैं..
बहस ना करो इनसे, जाना हो  जहाँ भी,
ख़ुशी से जाना, की लेने के देने पड़े हैं...
सवारी  की राह में, कतार में खड़े हैं...

Thursday, 26 August 2010

समन्दर की लहरें..

दिखती हैं  समन्दर  की  लहरें...
पानी में चक्र या बुल बुले गहरे ..
या जैसा नाच रहे हैं लहरे..
पानी ही बूंदों पे रखे है पहरे ...

Monday, 26 July 2010

पानी में सब मस्त हैं...

मस्ती के पानी  में सब मस्त हैं...
अपनेही  खेल में  सब व्यस्त  हैं...
पानी का यह पुराना नाता हैं..
डुबोता हैं, तो कभी हसाता हैं...
कभी आसूं बनकर रुलाता हैं... 
कभी शांति से हमें खिलाता हैं....
उग्र होकर कभी करता फस्त हैं...
मस्ती के पानी में सब मस्त हैं...

Thursday, 15 July 2010

दिखता हैं गिरजाघर...


हैरान मत होना यह तस्वीर देखकर..
कुछ खास  हैं, दिखता हैं एक  गिरजाघर...
ल़ोग आते हैं देखने देश विदेशसे..
तस्वीर आयीं हैं एक अलग सन्देशसे...
क्या दिखाती हैं ज़रा पहचान लेना..
इंसान खड़ा गगनमें ज़रा जान लेना..
देखो  इसे ज़रा  मन को रोककर...
कुछ खास हैं, दिखता हैं एक गिरजाघर...

Tuesday, 13 July 2010

बरसते झरने के तले..



नहाना हैं बरसते झरने के तले..
लुटने मजा सब साथ साथ चले..
बराचुक्की  दिखाता हैं पानी का खेल..
यहाँ पर बनता हैं सभी का मेल...
यहाँ पहाडोंके अंदर झरने हैं  पले...
नहाना हैं बरसते झरने के तले..